कविताहास्य व्यंग्य

व्यंग्य कविता – गजेन्द्र मोक्ष

मैंने कहा-भाई,
“आप” की रैली का तो उद्देश्य ही भटक गया
किसानों के लिये रैली
और किसान ही लटक गया
वे बोले-
हमारा आइडिया तो बहुत निराला था
हमने अपनी फिल्म “किसान रैली” में फाँसी को
एक आइटम साँग के रूप में डाला था
हमने सोचा था-
ये आइटम साँग सुपर हिट जायेगा
हमें क्या मालूम था कि
इतनी बुरी तरह पिट जायेगा
गजेन्द्र ने तो हमें बहुत बड़ा झटका दिया था
उसने खुद को नहीं
हमारी पूरी पार्टी को लटका दिया था
पर प्रभु ने हमारी बहुत मदद की
लोग भूकम्प के झटकों में झूल गये
अब हर तरफ उसी की चर्चा है
लोग गजेन्द्र को भूल गये
दोस्तों,ऐसी ओछी राजनीति के बारे में क्या कहा जाये
सतयुग में तो भगवान ने
गजेन्द्र को ग्राह से बचा लिया था
पर कलयुग में राजनीति के ग्राह से
भगवान भी गजेन्द्र को नहीं बचा पाये.

डाॅ.कमलेश द्विवेदी
मो.9415474674

One thought on “व्यंग्य कविता – गजेन्द्र मोक्ष

  • विजय कुमार सिंघल

    आआपा की घटिया राजनीति पर करारा व्यंग्य !

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