कविता

कविता

शहीदों को श्रद्धांजलि..

हूँ मै सिपाही __

वतन की मिट्टी मे देखो  सो गया हूँ ,

ना ढूंढना मुझे मैं अब खो गया हूँ |

वतन की खातिर मिटता आया हूँ ,

हूँ मैं सिपाही यूंही वतन के लिए लड़ता आया हूँ|

हैं ज़ख्म अभी गहरे भारत माँ के जानता हूँ ,

है नहीं महफूज़ देश की सुरक्षा मानता हूँ |

ना उम्र ,ना माँ के आँसु ,ना घर बार देखता हूँ ,

अपने वतन के लिए जीता और मरता हूँ |

जब तक है जान ना आन, शान इसकी मिटने दूंगा ,

मेरे खून का इक – इक कतरा न्योछावर इसपे करता हूँ

हाँ हूँ मै सिपाही यूंही वतन के लिए जीता हूँ |||

कामनी गुप्ता जम्मू ***

 

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |

4 thoughts on “कविता

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत खूब !

    • कामनी गुप्ता

      धन्यवाद सर जी!

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    बहुत अच्छी कविता .

    • कामनी गुप्ता

      Ji dhnyabad

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