कविता

विदा

अँजुरी में अनाज
बिना देखे
विदा पीछे दे उछाल
बिटिया सोचे
हमें निकाला
समृद्धि न जाए
माँ..
गीला आँचल लिए
पा…
दिवालिया से
भइया…
कतराए कतराए
दुनिया की रीति
निभे न निभाए
सीता…
राम संग जाए
वन गमन
संदेह
अग्नि परीक्षा
सर्वांग सिहरे
घर…………..
मायका हुआ जाए रे~~~~~

#निवेदिता

One thought on “विदा

  • विजय कुमार सिंघल

    बढ़िया !

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