क्षणिका

एक क्षणिका

नहीं हुआ मिलन
राम का सीता से
पुरुरवा का उर्वशी से
लैला का मजनूं से
सोनी का महिवाल से
शीरी का फरहा से
रोमियो का जूलियट से
मस्तानी का बाजीराव से
अंतिम दिनों में
क्यों?

अरुण निषाद

डॉ. अरुण कुमार निषाद

निवासी सुलतानपुर। शोध छात्र लखनऊ विश्वविद्यालय ,लखनऊ। ७७ ,बीरबल साहनी शोध छात्रावास , लखनऊ विश्वविद्यालय ,लखनऊ। मो.9454067032

6 thoughts on “एक क्षणिका

  • विजय कुमार सिंघल

    अच्छी क्षणिका !

    • अरुण निषाद

      साभार धन्यवाद सर जी.सादर प्रणाम

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    किओंकि इस संसार में अगर अच्छाई है तो बुराई भी है .

    • अरुण निषाद

      साभार धन्यवाद सर जी.प्रणाम

    • अरुण निषाद

      प्रणाम सर जी

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