कविता

सूर्य का प्रभामंडल

हर व्यक्ति का एक औरा होता है,
जिसे हम प्रभामंडल कहते हैं,
इसी प्रभामंडल में उसके सभी गुण-अवगुण,
निवास करते हैं.
प्रभामंडल खुद कुछ नहीं कहता है,
जो कुछ कहना होता है,
वह उसके प्रभामंडल में दिखता है,
इसलिए तो हम उसे प्रभामंडल कहते हैं.
सूर्य का भी एक प्रभामंडल होता है,
जो अति जाज्ज्वल्यमान होता है,
सूर्य भी कभी कुछ नहीं कहता,
बस उसकी प्रज्वलित रश्मियों के द्वारा,
उसकी सभी विशेषताओं का प्राकट्य होता है.
सूर्य बिना किसी भेदभाव के,
सबको समान रूप से रोशन करता है,
पर इस बात को सूर्य ने कभी नहीं कहा,
जो कुछ कहना होता है,
उसका प्रभामंडल कहता है.
हम ही कहते रहते हैं, आज सूर्य फीका लग रहा है,
असल में सूर्य कभी फीका नहीं होता,
वह तो बिन बुलाए बादलों के सामने आने पर,
उनका भी तहेदिल से स्वागत करता है,
अतिथि की तरह बादलों के जाने पर,
पुनः अपने तेज में स्थित होता दिखता है.
सूर्य किसी के पीछे भागता नहीं है,
धरा ही उसके चारों ओर चक्कर लगाती रहती है,
धरा अपना जो भाग उसके सम्मुख ले आती है,
उसी को सूर्य की रोशनी मिलती रहती है.
सूर्य अपने तेज से अनगिनत कीटों को निस्तेज कर,
स्वतः हमें स्वस्थ रखने में सहायक होता है,
पर उसके मन में कभी भी इसका अहंकार नहीं होता है,
वह तो निष्काम भाव से अपने कर्म-रथ पर आरुढ़ रहकर,
गीता के इस सदुपदेश के साकार रूप को संजोता है.
सूर्य अपने निश्छल स्वभाव से हमें अनुशासन की सीख देता है,
समय पर प्रकट होता, समय पर चंद्रमा को तेज देता है,
तारों की टिमटिमाहट में भी तेज समाहित है उसी का,
अग्नि को भी वही तो वास्तव में सेता है.
बताइए तो भला वृक्ष क्यों सूर्योन्मुख होता है,
उससे ही तेज को पाकर सूर्य को नमन करता है,
वही सागर से खारे पानी को खींचकर बादल बनाता है,
वही बादलों को बरसाकर नदियों को,
मधु-सदृश मीठे जल से आप्लावित करता है.
हर व्यक्ति की तरह,
सूर्य का भी एक औरा होता है,
जिसे हम प्रभामंडल कहते हैं,
इसी प्रभामंडल से सूर्य की आभा से,
हम प्रकाशित रहते हैं.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

11 thoughts on “सूर्य का प्रभामंडल

  • शिप्रा खरे

    बहुत ही गहन…बहुत सुंदर

    • लीला तिवानी

      प्रिय सखी शिप्रा जी, अति गहन प्रतिक्रिया के लिए आभार.

  • विभा रानी श्रीवास्तव

    गज़ब की लेखनी ….. नमन

  • विभा रानी श्रीवास्तव

    गज़ब की लेखनी ….. नमन

    • लीला तिवानी

      प्रिय सखी विभा जी, आपके नज़रिए को नमन. अति सुंदर व सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

  • मनमोहन कुमार आर्य

    अति सुंदर श्रेष्ठ विचार एवं सूर्य के प्रति भावनाओं की श्रेष्ठ अभिव्यक्ति। सादर नमस्ते बहिन जी।

    • लीला तिवानी

      प्रिय मनमोहन भाई जी, सूर्य तो सूर्य ही है. अति सुंदर व सटीक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

  • सूर्य का भी एक औरा होता है,

    जिसे हम प्रभामंडल कहते हैं,

    इसी प्रभामंडल से सूर्य की आभा से,

    हम प्रकाशित रहते हैं. इन चार लाईनों ने ही सब कुछ कह दिया . अत्ति सुन्दर विचार .

    • लीला तिवानी

      प्रिय गुरमैल भाई जी, अति सुंदर व सटीक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

  • कामनी गुप्ता

    बहुत ही खूब मैम

    • लीला तिवानी

      प्रिय सखी कामिनी जी, अति सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आभार.

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