कविता

कविता : कच्चे धागे

कभी अजनबी…
कभी पहचाने से
तुम लगो !
बँध गया है इक रिश्ता,
कच्चे धागे से !!

मर्यादित है…
ना बांधो इसे
रिश्तों में !
बिन नाम के भी प्यारे से
रिश्ते होते हैं !!

न प्यार है…
न है दोस्ती,
यूँ हम-तुम में !
बस तुम से बातें करना
अच्छा लगता है !!

रहेंगे सदा…
बँध कर,
अपनी परिधि में !!
वरना टूट जाएगा
कच्चे धागे से बँधा ये रिश्ता !!

अंजु गुप्ता

*अंजु गुप्ता

Am Self Employed Soft Skill Trainer with more than 24 years of rich experience in Education field. Hindi is my passion & English is my profession. Qualification: B.Com, PGDMM, MBA, MA (English), B.Ed