बाल कविता

जग खुशहाल बना देना

आई बाल दिवस की वेला,
हम तुमको कुछ बतलाएं,
कुछ तुमसे भी सीखेंगे हम,
कुछ तुमको हम सिखलाएं.

 
बच्चे मन के सच्चे होते,
सच्चे बनकर दिखलाना,
साहस के पुतले हो सबको,
सीख निराली सिखलाना.

 
सपने देखो, उन सपनों को,
पूरा करना, मत डरना,
सपनों को ही लक्ष्य बना लो,
खुशियों से अग-जग भरना.

 
शांति-अमन का पाठ पढ़ाकर,
देश की शान बढ़ा देना,
नई-नई तकनीकों से,
जग खुशहाल बना देना.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244