लघुकथा

चंदा मामा

अंकिता अपनी छह साल की बेटी कनु को सुलाने लगी तो उसने ज़िद की “मम्मी लोरी सुनाओ.”
अंकिता ने बहुत सोंचा फिर गाने लगी “चंदा मामा दूर के…..”
उसे बीच में ही रोक कर कनु बोली “मम्मी चंदा को मामा क्यों कहते हैं.”
“वो इसलिए कि जो बातें हम किसी से नहीं कर पाते हैं वह हम चंद्रमा से कर सकते हैं.”
“तो क्या चंदा मामा हमारी बात सुनते हैं.”
“हाँ सुनते हैं. अब चुपचाप सो जाओ.” अंकिता ने उसे डांटते हुए कहा.
कनु के सो जाने के बाद अंकिता रसोई में चली गई. कुछ देर बाद जब वह लौट कर आई तो उसने देखा कि कनु खिड़की पर खड़ी चंद्रमा से बात कर रही थी “चंदा मामा आप मेरे मम्मी पापा में फिर से दोस्ती करवा दीजिए. मुझे मम्मी पापा दोनों के साथ रहना है.”
उसकी बात सुन कर अंकिता की आँखें छलक पड़ीं.

*आशीष कुमार त्रिवेदी

नाम :- आशीष कुमार त्रिवेदी पता :- C-2072 Indira nagar Lucknow -226016 मैं कहानी, लघु कथा, लेख लिखता हूँ. मेरी एक कहानी म. प्र, से प्रकाशित सत्य की मशाल पत्रिका में छपी है