कविता
चुप रहकर भले ही तुमन सत्ता से यारी रखते हो, लेकिन अपने दिल से पूछो, क्या खुद्दारी रखते हो। जफ़ा
Read Moreउफ् इतनी गर्मी में ट्रेन खड़ी कर दी। आदमी, आदमी की तरह नहीं भेड़-बकरी की तरह ठूँसा पड़ा है, एकदम
Read Moreलो साल पुराना बीत गया। अब रचो सुखनवर गीत नया।। फिरकों में था इन्सान बँटा, कुछ अकस्मात् अटपटा घटा। तब
Read Moreचालीस वर्षीय जाने – माने समाज सुधारक कमल ‘पुष्प’ जी सामने बैठे श्रोताओं को बता रहे थे, “माता – पिता
Read Moreगाँव से रघु की माँ सुलोचना उसके पास शहर आई तो संयोगवश उसी महीने उनका जन्मदिन भी था। पड़ोस की
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