कविता

न वो बदले हैं , न हम बदले है …!!

न वो बदले हैं , न हम बदले है ,

बस हमारे बीच अब बदले हैं।

 

सच की दहलीज़ पर यूँ बैठे हैं ,

कि मानो हकीकत में कई परदे हैं।

 

नाउम्मीदगी का कोई निशां नहीं ,

फिर भी निराशा की जंजीरों में हम जकड़े हैं।

 

गुलामी का सबब याद है,

फिर क्यों खुद से हम खुद जकड़े हैं।

 

अब कौन आकर जगायेगा ,

भगत ,आज़ाद या सुभाष की तरह,

जिनकी नींद पर बेख़ौफी के ताले हैं।

 

रवि शुक्ल ‘प्रहृष्ट’

 

रवि शुक्ला

रवि रमाशंकर शुक्ल ‘प्रहृष्ट’ शिक्षा: बी.ए वसंतराव नाईक शासकीय कला व समाज विज्ञानं संस्था, नागपुर एम.ए. (हिंदी) स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्व विद्यालय, नागपुर बी.एड. जगत प्रकाश अध्यापक(बी.एड.) महाविद्यालय, नागपुर सम्प्रति: हिंदी अध्यापन कार्य दिल्ली पब्लिक स्कूल, नासिक(महाराष्ट्र) पूर्व हिंदी अध्यापक - सारस्वत पब्लिक स्कूल & कनिष्ठ महाविद्यालय, सावनेर, नागपुर पूर्व अंशदायी व्याख्याता – राजकुमार केवलरमानी कन्या महाविद्यालय, नागपुर सम्मान: डॉ.बी.आर.अम्बेडकर राष्ट्रीय सम्मान पदक(२०१३), नई दिल्ली. ज्योतिबा फुले शिक्षक सम्मान(२०१५), नई दिल्ली. पुरस्कार: उत्कृष्ट राष्ट्रीय बाल नाट्य लेखन और दिग्दर्शन, पुरस्कार,राउरकेला, उड़ीसा. राष्ट्रीय, राज्य, जिल्हा व शहर स्तर पर वाद-विवाद, परिसंवाद व वक्तृत्व स्पर्धा में ५०० से अधिक पुरस्कार. पत्राचार: रवि शुक्ल c/o श्री नरेन्द्र पांडेय पता रखना है अन्दर का ही भ्रमणध्वनि: 8446036580