गीतिका/ग़ज़ल

कभी सवाल तो कभी जवाब जैसी है…

कभी सवाल तो कभी जवाब जैसी है
हमारी ज़िन्दगी खुली किताब जैसी है

हुई नसीब रोटियाँ किसी को मुश्किल से
किसी को ज़िन्दगी मिली नवाब जैसी है

गुजर गयी तमाम रात बस नशे मे ही
हमारे यार की नजर शराब जैसी है

किसी की बात की कटार चीरती है दिल
किसी की बात प्रीत के गुलाब जैसी है

हँसे हुए तो मुद्दते हुई हमे यारो
हँसी गरीब के लिये तो ख्वाब जैसी है

चली है साथ साथ हर कदम कदम मेरे
किसी की याद महकते गुलाब जैसी है

सतीश बंसल
१८.०२.२०१७

*सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत प्रकाशित पुस्तकें : " गुनगुनांने लगीं खामोशियां" "चलो गुनगुनाएँ" , "कवि नही हूँ मैं", "संस्कार के दीप" एवं "रोशनी के लिए" विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत.