लघुकथा

भुजिया-गुझिया

होली में रंगों से सराबोर करके भी, कुर्ते फाड़कर भी हम उन दोस्तों कहते हैं- बुरा ना मानो होली है। दोस्त लाख गाली-गलौज करते हैं, फिर भी होली के दिन इसे हम बुरा नहीं मानते हैं, अपितु उन्हें घर ले जाकर घर बने पूवे-पकवान खिलाते हैं । इनमें किसी भी धर्मावलम्बी दोस्त हो !अब तो इस सुअवसर पर नमकीन चीजें भी बनती हैं, गुजिया, भुजिया, दहीबड़ा, पापड, पकौड़े, कचरी, बड़ी इत्यादि। अब तो होली के दूसरे-तीसरे दिन, यहाँ तक कि सप्ताहांत तक बासी पूवे खाने-खिलाने का अलग ही क्रेज है, वो भी शिमला मिर्चवाले अचार के साथ स्वाद का क्या कहना ? फागुन पूर्णिमा को लेकर सप्ताह-पन्द्रह दिनों से होली-गीतों और कजरी-गीतों की रिहर्सल शुरू हो जाती है, किन्तु अब वैसी होली-गीतों के गायन का जमाना लद गए । पहले तो घर-घर जाकर लोग ढोलों की थाप और खँजरी बजा-बजा कर होली का सेलिब्रेशन करते थे, लोग राजनीतिक व्यक्तियों पर कमेंट कसते थे और साथ ही कह देते थे- बुरा ना मानो होली है।

जब से यह पर्व शुरू हुई है, तब से लोग बुरा नहीं मान रहे हैं ! ऐसा सोचते हैं लोग । मंगरु भैया यह कहकर आज से ही टिहोक रहे हैं !

डॉ. सदानंद पॉल

एम.ए. (त्रय), नेट उत्तीर्ण (यूजीसी), जे.आर.एफ. (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), विद्यावाचस्पति (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर), अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी के प्रशंसित पत्र प्राप्तकर्त्ता. गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स इत्यादि में वर्ल्ड/नेशनल 300+ रिकॉर्ड्स दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 12,000+ रचनाएँ और संपादक के नाम पत्र प्रकाशित. गणित पहेली- सदानंदकु सुडोकु, अटकू, KP10, अभाज्य संख्याओं के सटीक सूत्र इत्यादि के अन्वेषक, भारत के सबसे युवा समाचार पत्र संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में अर्हताधारक, पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.