कविता

तेरा जानवर

तू मेरी जान जानू मैं तेरा वर
मैं तो हु पगली तेरा जानवर
शादी के बाद बन गया जोकर
सब कुछ करता अब सहकर
तू मेरी जान जानू मैं तेरा वर…..

कराओ शॉपिंग बैठी है रूठकर
कहती दो पैसा खरीदूंगी जमकर
पैसा निकलवाती मुझसे लड़कर
खरीददारी भी करती है जमकर
तू मेरी जान जानू मैं तेरा वर…..

सुबह बैठ जाती जल्दी उठकर
चाय पीना बालकनी में बैठकर
सुबह से मेकअप चालू दिए कर
क्रीम पावडर चालू रहे दिनभर
तू मेरी जान जानू मैं तेरा वर…..

खाना बनवाती रोज पकड़कर
बर्तन भी धुलवाती है लड़कर
कहती कपड़े भी सूखा दो छतपर
न करो तो बैठी रहे मुह फुलाकर
तू मेरी जान जानू मैं तेरा वर…..

शादी के पहले देखे सपने जमकर
काम करूँगा मेहनत वाला दिनभर
अब बैठा हूँ मै तो सिर पकड़ कर
सब कुछ करवाती मुझसे लड़कर
तू मेरी जान जानू मैं तेरा वर…..

ये तो पगली हँसी मजाक का व्यंग है
असल मे पगली तू मेरा आधा अंग है
फिर भी करती क्यों मुझसे रोज जंग है
मैं तो कह रहा रहना हरदम तेरे संग है

सोमेश देवांगन
गोपिबंद पारा पंडरिया
जिला – कबीरधाम (छ.ग.)

सोमेश देवांगन

गोपीबन्द पारा पंडरिया जिला-कबीरधाम (छ.ग.) मो.न.-8962593570