कविता

कविता

काँटों से भरी शाखों पर – लगे फूलों को
चूम लेती हैं तितलियाँ – और उनके पर नहीं छिलते
बेवजह ही लोग – नाराज़ हो जाते हैं हमसे
क्यूँकि सौदा अपने दिल का – दिल हार कर नहीं करते
कहानियाँ तो बुहत सारी हैं – परवानों के जलने की
मगर शमा के दर्द के बारे में – कोई नहीं लिखते
वजह तो ज़रूर है कोई – परवानों के जलने की
बेवजह तो यूं ही – शमा पर परवाने नहीं जलते
हसीनों की आँखों से – छलकते नही आँसू
भिछडते हैं जो एक बार – वोह वापस नही मिलते
रूह छलनी हो जाती है – जफ़ाओं की मार से
इसी लिये तो हम – बे वफ़ाओं से मोहब्बत नही करते
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तयार तो हैं हम हमेशा – मोहब्बत का खेल ऱेलने के लीये
मगर अनाओं की वजह से – दिल आपस में नही मिलते
कया करो गे तुम – सुन कर दासतान हमारी मोहब्बत की
बयान हो गई नही हम से – जुबान ख़ामोशी की आप नही समझते
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ठोकर ना मारो कभी किसी को – राह का पथर समझकर ‘मदन’
दीवारों में आज कल हम – लोगों को नही चुनते
ग़म दिलों के छुपे होते हैं – शायर के लफ़ज़ों में
ऐसे ही नही तो शायर – ग़ज़लों को हैं लिखते

मदन लाल

Cdr. Madan Lal Sehmbi NM. VSM. IN (Retd) I retired from INDIAN NAVY in year 1983 after 32 years as COMMANDER. I have not learned HINDI in school. During the years I learned on my own and polished in last 18 months on my own without ant help when demand to write in HINDI grew from from my readers. Earlier I used to write in Romanised English , I therefore make mistakes which I am correcting on daily basis.. Similarly Computor I have learned all by my self. 10 years back when I finally quit ENGINEERING I was a very good Engineer. I I purchased A laptop & started making blunders and so on. Today I know what I know. I have been now writing in HINDI from SEPTEMBER 2019 on every day on FACEBOOK with repitition I write in URDU in my note books Four note books full C 403, Siddhi Apts. Vasant Nagari 2, Vasai (E) 401208 Contact no. +919890132570