कविता

मुसकराहट

मुसकराहट आप की हमें – मीठी मीठी सी लगती है बिना आप के यिह दुनिया – हमें अधूरी सी लगती है खोना चाहते नही हम आप को – किसी भी हालत में बिना आप के साँस भी हमारी – टूटी टूटी सी लगती है — समझौते की ज़नजीरों में – कुछ अैसे बंध गैए हैं […]

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हमराह

हमराह हमारे ज़िनदगी के सफ़र में – कोई भी नही है अकेले रैह गैए हैं हम – किसी को हमारी ज़रूरत नही है वजूद अपना खो चुके हैं हम – भुझती हुई शमा की माननद अनधेरा हो गैया है ज़िनदगी में – कया रौशनी की हमें ज़रूरत नही है — यूं तो हर शख़स करता […]

कविता

मुसाफ़िर

मुसाफ़िर हैं हम तो इस दुनिया में – एक अैसे कारवान के ज़िनदगी में जो कभी भी – आगे बढ़ने से ढरता नही है शोला हैं हम तो ज़िनदगी की – उस जलती हुई आग के भडकने से और ज़ियदा – जो कभी भी रुकता नही है जज़बा बुहत है हम में – किसी की […]

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कविता

बे वफ़ा लोग ही गुज़ारते हैं रातें – बे चैनी की हालत में वफ़ा करने वालों को तो जीने की – होश ही नही है यिह तो एक ख़याल था भूल जायिे – अैसे ख़यालों को ज़िनदगी पर हंसने वालों की तो – दुनिया मे क़मत नही है — समाए रैहते हैं इस तराह के […]

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ज़िन्दगी

क़ीमत हर एक रिश्ते की – इस दुनिया में चुकानी ही पडती है दर्द जिस क़दर भी हो दिल में – मुस्कराहट लबों पर लानी ही पडती है राहे उल्फ़त के अन्धेरों को – मिटाने के लिये इन्सान की ज़िन्दगी से कभी कभी शमाह दिल के ज़ख़्मों की – ज़िन्दगी में जलानी ही पडती है […]

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कविता

कहाँ कहाँ लिए फिरते हम – अपनी ज़िनदा लाश को अपने काँधों पर इस लिए ख़ुद को ही हम ने – अपने जिसम से जुदा कर लिया है छुपी हुई तो होती हैं बुहत सारी – ख़ुशियाँ ग़मों के पैहलूं में ज़रूर मगर बिछडते ही उन के – इन ख़ुशियों ने भी मूंह हम से […]

कविता

कविता

यह कैसी हवा चल रही है जो अैसी हालत बन गैई है ज़िन्दगी की सिसक सिसककर ख़ुद रो रहे हो पल पल हमें रुला रहे हो ज़िन्दगी में हंस हंसकर जब किसी ने पूछा हाल हम से हमारे बेचैन दिल का याद आ गैऐ हमें भूले हुऐ सारे रंजओग़म हमारी इस ज़िन्दगी के क़िसा था […]

कविता

कविता

बिछड जाते हैं जब – हम सफर आप के टूट जाते हैं फिर – सारे हौसले आप के अफसाने आप के दर्द के – सुनता नहीं कोई उदासी में चुप चाप – दिन गुज़रते हैं आप के — बडी ही खूबसूरती से – आप छुपाते हैं दिल की बात को नमी होती है आँखों मे […]

कविता

कविता

कारवान हमारी ज़िन्दगी का – चलता रैहता है हमेशा अपनी ही हीरफ़्तार पर कल सुबह होगी या नही – सोचते ही नही हम कभी भी रात को ठहर कर पूछते भी नही हम कभी किसी को – कि अब किस रास्ते पर चलना है हमें रुकते भी नही हम किसी के लिये – रास्ते में […]

कविता

कविता

यादें उन की बिखरी हुई हैं – हमारी ज़िन्दगी की राहों में काँच के टुकडों की तराह से – हमारी ज़िन्दगी की राहों में मुहब्बत हमारी चलती रैहती है – इन राहों पर बे फिक्र हो कर लहू बेशक बैहता रहे बेहताशा – जख्मों से हमारे पाओं में — ना तडपने की इजाज़त है हमें […]