कविता

आ कर हमारे ख़्वाबों में

आ कर हमारे ख़्वाबों में – हमारी बे ख़ुदी को बढ़ा दिया
ताबीर से हमारे ही ख़्वाबों की – हमारी उमीदों को जगा दिया
नूर आप ही की मोहब्बत का – छाया हुआ है पूरी फ़ड़ा में
हर फूल पता इस चमन का – शबनम के मोतियों से नहा लिया

जानता हूं मैं आप के किरदार को- बुहत ही अछी तरा से
मोहब्बत के जज़बे के शौक़ में – सर हम ने सजदे में झुका दिया
बिन बताए ही आप ने – समझ लिया हमारे दिल के दर्द को
बिना इबादत के ही आप ने – हम को हमारे ख़ुदा से मिला दिया

मरने के लिये इस दुनिया मे – तरीके और भी बुहतनहैं
नाम बे चारी ज़हर का तो यूं ही – बे वजाह बदनाम हो गिया
इन्तखाब के हमारे शौक़ ने – धोखा हमें दे दिया
ना चाहते हुए भी हम ने – ख़ुदा आप को अपना बना लिया

क़ब्र से भी कम जगह चाहिये – हम को तो सोने के लिये
चोट लगी हमारे सर पर – पाओं जब हम ने फैला दिया
अदावत में एक दूसरे की – इस क़दर मशग़ूल हो गैये हम
ग़फ़लतों को अपनी ही हम ने – मजबूरी ही अपनी बना लिया

उजालों की वैसे तो कोई – कमी नही थी हमारी ज़िनदगी में मदन
मगर रौशनी बढ़ाने के लिये राहों की – घर हम ने अपना ही जला दिया
मुमकिन है इस के बाद फिर कभी – मुलाकात हमारी हो ना हो
इस लिये इस मुलाकात को हम ने – मुलाकात ज़िनदगी की बना दिया

— मदन लाल

मदन लाल

Cdr. Madan Lal Sehmbi NM. VSM. IN (Retd) I retired from INDIAN NAVY in year 1983 after 32 years as COMMANDER. I have not learned HINDI in school. During the years I learned on my own and polished in last 18 months on my own without ant help when demand to write in HINDI grew from from my readers. Earlier I used to write in Romanised English , I therefore make mistakes which I am correcting on daily basis.. Similarly Computor I have learned all by my self. 10 years back when I finally quit ENGINEERING I was a very good Engineer. I I purchased A laptop & started making blunders and so on. Today I know what I know. I have been now writing in HINDI from SEPTEMBER 2019 on every day on FACEBOOK with repitition I write in URDU in my note books Four note books full C 403, Siddhi Apts. Vasant Nagari 2, Vasai (E) 401208 Contact no. +919890132570