कविता

मन मयुर

तन मन मेरा भीग गया था
जब नभ से वर्षा आई थी
तुम याद हमें आई थी सनम
जब सावन की मेघा छाई थी

जब मन मयुर पंख लगा कर
आसमां की सैर कराया  था
जब हल्की बारिस के कीचड़ ने
तन मन को लिपट  रुलाया था

जब बादलों के बीच बदरी
गर्जन कर शोर मचाया  था
डर से छिप कर प्रकृति ने
बिजली की कौंध बरपाया था

जब वर्षा की बूंदों की  धारा
सरिता के हृदय में समाई थी
जब नदियॉ तेज प्रवाह में बह
सागर की ऑचल में छुप आई थी

जब झिंगुर झुरमुठ की महलों में
बैठ मस्ती की सुर में  गुनगुनाया था
जब दादुर उछल उछल कर जल में
होली की जश्न    मनाया      था

जब सावन के झूले पड़े थे सूने
अक्सर तेरो याद हमें आई थी
इस सावन में धोखा मत  देना
वो सावन हमें बहुत रूलाई थी

— उदय किशोर साह

उदय किशोर साह

पत्रकार, दैनिक भास्कर जयपुर बाँका मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार मो.-9546115088