ब्लॉग/परिचर्चा

हमने भी सीखा-7

दो मुक्तक

सबल बनना चाहो,
तो खुद को सामर्थ्यवान समझो,
वरना निर्बल बनने को कौन
रोक सकता है!

प्यार एक मधुर भावना है,
प्यार में न लेने न देने की कामना है,
मन में मुहब्बत वाला
सबसे ज्यादा खूबसूरत तब लगता है,
जब उसमें न कोई विकार न वासना है.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244