ब्लॉग/परिचर्चा

हमने भी सीखा- 10

मुक्तक

दूर रहो या पास
तेरे होने का ख्याल ही
मन को राहत देता है.

जीतने की ख्वाहिश बहुत है…
हर मोड़ पर ताज पाने की सिफारिश बहुत है,
हमें तो जो मिला, जैसा मिला, खा लिया और जी लिए…
सारे जहां का हो भला, अपने प्रभु से गुजारिश बहुत है.

तू ही मेरी इबादत, तू ही मेरी इनायत
एक प्रच्छन्न-सी उम्मीद है
तेरे मिलने की
न भी मिल सके तो
न कोई गिला-शिकवा
न कोई शिकायत

मुझे लगाव है तेरे शब्दों से भी
खामोश ही सही घाव तो नहीं करते

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244