मुक्तक/दोहा

हमने भी सीखा- 13

मुक्तक

सुथरे कान वाले ही सुन सकते हैं
खामोशियों की आवाज
वरना आजकल किसी के
सुनने का रिवाज ही कहां है!

जल्दी जागना हमेशा फायदेमंद ही होता है,
फिर चाहे वह “नींद” से हो
या “अहम” से हो
या फिर “वहम” से हो.

एक बात हमने समझ ली है
तेरा मिलना नामुमकिन तो नहीं
हमें मुमकिन करना आए तो सही

जो परिभाषा में कैद हो जाए
वो मौन ही क्या
मौन तो मन को मुक्त करता है

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244