कविता

प्रेम भावना है शब्द नहीं

बचपन से बड़े होने तक
हम सभी ने लैला मजनू
हीर रांझा, सोनी महिवाल
के किस्से सुने, पड़े और
फिल्मों में देखे हैं
और यही जाना की सच्चा प्रेम
बस यही है जो इन जोड़ियों ने  किया
क्योंकि  प्रेम तो एक खूबसूरत
एहसास है जो दिल से दिल
का होता है न की शब्दों का
पर समय के साथ जैसे
सब बदला प्रेम का रूप , प्रेम का नाम, प्रेम का एहसास भी बदल गया और
रह गया सिर्फ
तो बस एक शब्द भर
जिसे बोल कोई भी
किसी को भी छल सकता है
उस का फायदा उठा सकता है
उसके दिल और ज़ज़्बातों से
खेल सकता है
और यूँ
प्रेम में न एहसास रहे न भाव
बस बन गए शब्द यूँ आम से
चलते फिरते मॉल, बगीचे, सिनेमा घर,
पब, डिस्को , पार्टी ….हर जगह
जहां प्रेम का नामोनिशान नहीं
बस मूक शब्द बोलते हैं
बिन नाम बिन एहसास बिन भाव बेनाम से।।
— मीनाक्षी सुकुमारन

मीनाक्षी सुकुमारन

नाम : श्रीमती मीनाक्षी सुकुमारन जन्मतिथि : 18 सितंबर पता : डी 214 रेल नगर प्लाट न . 1 सेक्टर 50 नॉएडा ( यू.पी) शिक्षा : एम ए ( अंग्रेज़ी) & एम ए (हिन्दी) मेरे बारे में : मुझे कविता लिखना व् पुराने गीत ,ग़ज़ल सुनना बेहद पसंद है | विभिन्न अख़बारों में व् विशेष रूप से राष्टीय सहारा ,sunday मेल में निरंतर लेख, साक्षात्कार आदि समय समय पर प्रकशित होते रहे हैं और आकाशवाणी (युववाणी ) पर भी सक्रिय रूप से अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत करते रहे हैं | हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रहों .....”अपने - अपने सपने , “अपना – अपना आसमान “ “अपनी –अपनी धरती “ व् “ निर्झरिका “ में कवितायेँ प्रकाशित | अखण्ड भारत पत्रिका : रानी लक्ष्मीबाई विशेषांक में भी कविता प्रकाशित| कनाडा से प्रकाशित इ मेल पत्रिका में भी कवितायेँ प्रकाशित | हाल ही में भाषा सहोदरी द्वारा "साँझा काव्य संग्रह" में भी कवितायेँ प्रकाशित |