गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – घबरायी होगी

ख़त मेरा वो पायी होगी।
जी भर वो इतरायी होगी।।
घर लगता है घर सा मुझको।
शायद  घर वो  आयी होगी।।
देख दरीचे से फिर मुझको।
मन ही मन शरमायी होगी।।
दी होगी  द्वारे पर दस्तक।
पर थोड़ा घबरायी होगी।।
मुझे  देखकर  तस्वीरों  में।
अपना मन बहलायी होगी।।
— आशीष तिवारी निर्मल 

*आशीष तिवारी निर्मल

व्यंग्यकार लालगाँव,रीवा,म.प्र. 9399394911 8602929616