लघुकथा

आरजू

श्यामला को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के ऑस्कर पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था.”
पुरस्कार लेने के लिए वह संयुक्त राज्य अमेरिका जा रही थी. मन में खुशी के साथ एक और मंजर भी नमूदार हो रहा था.
एक समय वह ऐसे दोराहे पर खड़ी थी, कि उसे खुद भी पता नहीं था कि वह किधर जाएगी.
बारहवीं की परीक्षा के बाद अपने वादे के मुताबिक उसके पिताजी ने उसको बढ़िया-सा मोबाइल दिला दिया. अब वह मोबाइल के साथ ही खेलती भी थी और पढ़ती भी थी.
एक दिन उसने एक कहानी का वीडियो देखा, जिसमें कहानी की प्रस्तुतकर्त्ता शालिनी थी. कहानी तो जोरदार थी ही, शालिनी के अभिनय का जवाब नहीं.
“क्या भाव-भंगिमा, क्या उतार-चढ़ाव और क्या खनकती आवाज!” श्यामला को आनंद आ गया.
उसने कई बार वीडियो देखा. अब तो उसे सब कुछ मूजबानी याद हो गया था. ऐसे ही उसने खुद बोलकर रिकॉर्ड कर वीडियो बना लिया.
“ए जी सुनते हो, और ला दो मोबाइल! अब सारा दिन पता नहीं बार-बार कौन सी कहानी सुनती रहती है?” पति के ऑफिस से आते ही श्यामला की मां ने उसकी शिकायत की.
“अरे वाह, क्या गज़ब का वीडियो बनाया है! तुझे ये आइडिया कैसे आया?” पिताजी ने भी वीडियो देखकर उससे कहा.
“बापू, मुझे भी अभिनय का कोर्स करवा दो न! मैं अभिनेत्री बनना चाहती हूं.” श्यामला ने निहोरा किया.
“कर ले, कौन मना करता है! तू तो जन्मजात अभिनेत्री है. तेरी अध्यापिकाएं भी तो तुझे अभिनेत्री कहती हैं.”
“बापू, मां कहेंगी- छोरी है तू, घर का कामकाज सीख ले, छोड़ ये ऐक्टिंग-वैक्टिंग.”
“तू घबरा मत, बापू है न तेरे साथ!” बापू ने ही रास्ते के असमंजस को सुलझा दिया था.
“फिर क्या था! नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, दिल्ली” से प्रशिक्षण, नाटकों में अभिनय, विज्ञापनों में अभिनय, लघु फिल्मों में अभिनय, उसके बाद फिल्में और अब यह ऑस्कर!” यह सब बापू के कारण ही संभव हो सका.
“श्यामला को ऑस्कर का पुरस्कार लेने के लिए मंच पर आमंत्रित किया जा रहा है.”
“मेरी सफलता का श्रेय मां-पिताजी को है. सभी के माता-पिता बच्चों के सपने पूरे करने में मददगार हों, तो बच्चों के व्यक्तित्व में निखार आ सकता है और सफलता उनके चरण चूमती है, यही मेरी आरजू है.” ऑस्कर पुरस्कार लेने के बाद उसने दो शब्द बोलते हुए कहा.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244