लघुकथा

नहले पर दहला!

सीमा-सुरेश के विवाह का शानदार और अनोखा प्रबंध देखकर सभी बराती-घराती मेहमान अचंभित थे. एक-एक मेहमान के खाने-पीने और तस्वीर खिंचवाने का व्यक्तिगत रूप से ख्याल रखना सबको मोहित किए हुए था. मेहमानों ने इतना शानदार स्वागत शायद ही पहले कभी पाया हो!
“ठहरो, यह शादी नहीं होने पाएगी!” तभी अचानक धमाका करते हुए एक लड़की चिल्लाती हुई आ धमकी.
“सुरेश मेरे होने वाले बच्चे का पिता है.” उसने अपने बढ़े हुए पेट को दिखाते हुए कहा.
ओह! दाल भात में मूसलचन्द! रंग में भंग पड़ गया. सब वहीं-के-वहीं खड़े रह गए. अभी कुछ सोचें-सोचें कि “ठहरो” कहता हुआ एक और शख्स आ गया.
“पहले इस लड़की की असलियत जान लीजिए!” उसने स्पीकर के आगे अपना मोबाइल लगा दिया.
“सुरेश ने मुझे भाव नहीं दिया न! मैं भी उसे मजा चखाऊंगी. कहता था- “चमड़ी गोरी है तो क्या हुआ, दिल तो काला है!” उसे दिखाऊंगी कि काला दिल कैसा होता है?”
“ठहरो, भागकर कैसे जा सकती हो! अभी तो कुछ तमाशा और दिखाना है!” लड़की को पकड़कर उसने पेट से बांधे हुए उसके कपड़ों को निकालकर उसे बेनकाब कर दिया.”
दाल भात में मूसलचन्द पर यह नहले पर दहला था! मौके पर ही लड़की को पुलिस के हवाले कर दिया गया.
राग-रंग, गाना-बजाना, खाना-पीना पहले की तरह शुरु हो चुका था.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244