लघुकथा

लघुकथा : सोच

वे बोले, “रामदेव के प्रोडक्ट खराब हैं।”

मैं : हम नहीं खरीदते।

वे : दंत कांति तो बढ़िया है।

मैं : हम वो भी नहीं लेते।

वे : इतना बड़ा एंपायर खड़ा कर लिया है इसने और प्रोडक्ट भी बड़े महंगे हैं।

मैं : कंपीटीशन बहुत है, अगर प्रोडक्ट लोगों पसंद नहीं आएंगे, तो वे अपने आप फेल हो जायेंगे। जब हम खरीदते नहीं, तो हम फिक्र क्यों करें।

वे : सरकार इनकी मदद कर रही है। हिंदू मुस्लिम में भेद करती है और तुम जैसे लोग …. “देश की न सोचना”।

रामदेव के प्रोडक्ट खरीदूं या नहीं,,, मैं कोमा में हूं।

अंजु गुप्ता “अक्षरा”

*अंजु गुप्ता

Am Self Employed Soft Skill Trainer with more than 24 years of rich experience in Education field. Hindi is my passion & English is my profession. Qualification: B.Com, PGDMM, MBA, MA (English), B.Ed