कहानी

धन्यवाद फेसबुक

अम्बाला में सागर को आए करीब चार महीने बीत चुके थे। यहाँ सागर की प्रेक्टीकल ट्रेनिंग का समय अभी चल रहा था। इन दिनों में वह अपना खाली समय बिताने के लिए मोबाइल फोन पर व्यस्त रहता था। इसके साथ ही सागर को साहित्य से बेहद लगाव हो चुका था। शायद ही कोई दिन ऐसा होगा जब उसने कोई कविता न लिखी हो और अखबारों, साप्ताहिक पत्रिकाओं आदि में अपनी कृतियों के माध्यम से वह साहित्य क्षेत्र में अपनी पूरी धाक जमा चुका था। उसकी रचनाएँ बहुत रोमांचक थीं और सुंदर भी । उसकी लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढ़ती गई। सागर की फेसबुक पर पुरुषों से ज्यादा महिलाएं की संख्या अधिक थीं। महिलाओं में नूपुर उसकी एकमात्र पसंदीदा महिला मित्र थीं। वह उसकी कहानियाँ, कविताएँ और लेख बड़े चाव से पढ़ती और उन पर अपनी टिप्पणियाँ करतीं। सागर उसकी टिप्पणियों का बेसब्री से इंतजार कर रहा होता । इसके जवाब में वह भी नूपुर के कमेंट्स पर कुछ न कुछ प्रतिक्रया देता रहता । इन्हीं टिप्पणियों के जरिए दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए।
सागर की लिखी कविता “जीवन” पर पहली टिप्पणी नूपुर ने की थी। नूपुर ने लिखा, “उदास चेहरा, उदास मन, कोई रो रहा है, भीड़ में अकेला। उदास मन हैं यहाँ । कोई नहीं है किसी का सहारा ।”
सागर ने जवाब दिया, “नूपुर ! लगता है कि इस दुनिया में आप ही अकेली हैं। क्या सुख की जगह गमी ने ले रखी है ?” खैर खुश रहो। आज से तुम मेरी सच्ची फेसबुक मित्र हो”। बेशक आप मेरी दूर की मित्र हो और आप मेरी रचनाओं को बड़े चाव से पढ़ती हो। इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है, मेरे लिए ? एक अन्य काव्य कृति में , “तुम कहाँ हो ?” में सागर ने लिखा  ” बसंत फिर आ रही है। खुशियों का खजाना ला रही है। क्या पतझड़ के बाद भी बसंत आएगी ?” इस पर नूपुर ने लिखा , ” बेशक’ ।
  नूपुर ने सागर के काव्य कार्य की प्रशंसा की। उसने कहा  कि मैं तुम से बहुत प्रेरित हूँ । नूपुर ने भी कविताएँ लिखनी शुरू कर दीं । उसकी कविताओं में निखार लाने वाला सागर ही तो था । अपने स्कूल के दिनों में नूपुर को कहानियां लिखने का भी बहुत शौक था। फिर एक दिन अचानक उस पर पहाड़ टूट पड़ा । बस वहीं से उसके साहित्य का लघु सफर बंद हो गया।
   सागर ने नूपुर से इसका कारण पूछना चाहा लेकिन उसने  सागर को टाल दिया था। वह समझ नहीं पा रहा था कि अब क्या करे। वह हर हाल में नूपुर को पा लेना चाहता था ।
 सागर ने कविता संग्रह “याद” में एक कविता लिखी थी। “वह जो मुझे मेरे सपनों में जगाता है। मुझे मीठी यादों की याद दिलाता है। हर पल मेरे साथ चलता है। मेरी आँखों से आँख मिलाता है। कोई मेरे पास चुपके से आता है लेकिन आवाज़ नहीं करता। वह कौन है ? हाँ, यह कैसा रिश्ता है ?”
    नूपुर ने महसूस किया कि समुद्र की लहरें अब तेजी से बहने लगीं हैं अत: यहाँ समुद्र की लहरों के प्रवाह को रोकना अत्यावश्यक है अन्यथा उसका जीवन दागदार हो जायेगा।
   नूपुर के मन में ख्याल आया कि , “फेसबुक” भी विभिन्न रंगों की एक अजीब सी किताब है। इस पर नए रिश्ते बन रहे हैं और अनजाने में ही एक दूसरे से संबंध बिगड़ रहे हैं। दाम्पत्य जीवन में दरारें आ रहीं हैं। रिश्ते टूट रहें हैं। युवा पीढ़ी अपने माता-पिता को छोड़कर अकेले रहना पसंद कर रही है । अवैध संबंधों की चारों ओर बाढ़ सी आ गई है। आए दिन झगड़े बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में नूपुर को सागर की कविताओं पर अपनी की हुई टिप्पणियां अनुचित लगीं।
फिर भी नूपुर सागर को अपने दिल में बसाना चाहती थी। अपने कमेंट्स के जरिए वह सागर में डूब जाना चाहती थी। वे लोक-लाज से दूर रह कर सागर की काव्य-रचनाओं में टिप्पणियाँ करती रहती। बहुत खूब,लाजवाब, बहुत सुंदर रचना। अभी तक दोनों प्रेममय आनंद में सरोबर हो निरन्तर अपने पथ की ओर अग्रसर बढ़ते चले जा रहे थे।
   अचानक देर रात सोये हुए नूपुर को एक स्वप्न आया। स्वप्न में आवाज़ उसे परिचित सी लगी। मेरी प्रिय नूपुर !  तुम यह क्या करने चली हो ? पगली प्यार…. सब झूठ-फरेब। अब इस चक्रव्यूह में क्यों फँस रही हो ? यह बहुत बड़ा पाप है। अपने स्वर्गीय पति को धोखा दे रही हो। संभलो , हमारा युवी भी क्या सोचेगा ? नपुुर स्वप्न मेें हड़वाहट होकर उठी । वह पसीने में तर-बतर हो गई। उसके मन  में निराशा के भाव भर गए।
       लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था । सागर ने नूपुर को अपने जन्मदिन की पार्टी में आमंत्रित किया। नूपुर गहरी सोच में पड़ गई। फेसबुक ने उसे खूब रिवाइंड कराया। सागर के लिखे लेख व पार्क में बैठे-बैठे सागर की मनमोहक मुस्कान और प्यार की सारी बातें इत्यादि। इसलिए वह चाहते हुए भी सागर के निमंत्रण को ठुकरा न सकी और उसने अपने जीवन पर एक छोटी सी कविता लिखकर फेसबुक पर डाल दी। सागर समझ गया था कि नूपुर ने अपनी दोस्ती से हाथ क्यों खींच लिए थे और नूपुर ने उससे दोस्ती क्यों खत्म कर ली थी।
  सागर ने नूपुर से इसका कारण पूछना चाहा लेकिन नूपुर जवाब देने से बचती रही। सागर को पता चला कि नूपुर विधवा जीवन जी रही है और अपना समय दिल्ली में एक शिक्षक के रूप में बिता रही है और उसका एक युवा बेटा भी है। दूसरी तरफ नूपुर के मन में एक ख्याल आया कि कहीं सागर मुझे अस्वीकार न कर दे निःसंदेह सागर अविवाहित था लेकिन नूपुर उसको न जाने क्यों संसार की सर्वोत्तम औरत लगी ; जो आकर्षक भी थी और सुशील भी । वह नूपुर द्वारा उसकी कृतियों पर की गई लाजवाब टिप्पणियों पर बेहद मुग्ध था।
 पहले तो नूपुर भी सागर पर बहुत मोहित हुई फिर अचानक एक सुबह उसने सागर की रचनाओं पर किये अपने सारे कमेंट डिलीट कर दिए और सागर को फ्रेंडशिप लिस्ट से भी हटा दिया लेकिन सागर ने हार नहीं मानी। वह नूपुर  की फ्रेंड लिस्ट के जरिए उसकी पोस्ट देखता रहता था।
     सागर के जन्म दिवस सेलीब्रेट का आयोजन ताज होटल में रखा गया । सागर व नूपुर अपने काॅमन फ्रेंडेज के साथ  पार्टी में शामिल हुए। गाने के बीच में सभी दोस्त खुश थे। इस तरह फेसबुक दूर-दूर से अनजान दोस्तों को साथ लाया। सागर ने बर्थडे केक काटा और खचाखच भरी सभा में एलान किया कि आज से मैं और नूपुर पुन: सच्चे दोस्त बन गए हैं। दो फेसबुक मित्र बिना किसी औपचारिक संबंध के फिर से जुड़ गए। यह फेसबुक ही था जिसने उन्हें एक-दूसरे की ओर खींचा। नूपुर ने फिर से फेसबुक फ्रेंड लिस्ट में सागर का नाम जोड़ा। सुबह उठते ही उन्होनें कहा धन्यवाद  “फेसबुक”।
— वीरेन्द्र शर्मा वात्स्यायन 

वीरेन्द्र शर्मा वात्स्यायन

धर्मकोट जिला (मोगा) पंजाब मो. 94172 80333