कविता

नन्हीं प्यारी गुड़िया हमारी

घुटनों के बल रेंगती हाथों से चलती
ए ए करके मुझे अपने पास बुलाती
कभी दादा दादा आवाज लगाती
कभी तेजी से रेंगती मेरे पास आ जाती
पूजा की घंटी जब मैं बजाता
हाथ में पकड़ने से भी डर जाती
कभी चमच्च उठाती कभी थाली गिराती
अपने आप खाने को हाथ बढाती
बड़ी उत्सुकता से चिड़िया को देखती
उसके पीछे अपनी नज़र दौड़ाती
कभी दाएं कभी बाएं कभी ऊपर कभी नीचे
चिड़िया जब उड़ती दूर तक उस पर नज़र गड़ाती
नविका जब मैं छुप कर आवाज लगाता
मुझे देखने को इधर उधर नज़रें दौड़ाती
सरपट दौड़ती हाथों और घुटनों के बल
ढूंढ कर मुझे प्यार से मेरे साथ चिपक जाती
ए ए करके घर के दरवाजे पर ले जाती
बाहर घूमाने ले जाओ यह कहना चाहती
कंधे पर जब बैठती खुश हो जाती है
दूर आसमान में चांद को निहारती
सहारे सहारे खड़ी हो जाती अब
कभी खिलौने तोड़ती कभी किताब फाड़ जाती
कुछ भी मिल जाये मुंह में है डालती
दूध की कटोरी हाथ में लेकर उसको गिराती
नींद लगे जब आंखे मलती बार बार रोती
घुमाते घुमाते कंधे पर सिर रख कर सो जाती
भरे टब में बैठती थप्प थप्प करके हाथ चलाती
पानी से करती अठखेलियां खूब चिल्लाती
— रवींद्र कुमार शर्मा

*रवींद्र कुमार शर्मा

घुमारवीं जिला बिलासपुर हि प्र