नया साल है,
अरमान हजारों होंगे, फ़ज़ाएँ भी वो ही होँगी
सितारे भी वो ही होंगे, नज़ारे भी वो ही होंगे
इशारे भी वो ही होंगे, सब कुछ वो ही होगा
कुछ बदलेगा ही नहीं, नए साल की आमद
है, इरादे तो वोही होंगे, साल बदलने वाला है
तुम भी तो ज़रा बदलो, अहबाब भी वो ही और
महीने भी रहेंगें वो ही, मुफ़लिसी का भी वो ही
मंज़र होगा, कुछ नया नहीं,
अंदाज़ भी पुराना और हाकिम भी वो पुराने होंगे,
नए साल में मुस्कुरायेंगे, उम्मीदें भी कुछ नई होंगी।
जागा सुबह वो ही तन्हाई औऱ ज़ख़्म वो ही पुराने होंगे,
आज़माइशों की गोद में फिर
खुली आँखे शोर कैसा था,
साल नया होगा उम्मीदें भी
आरज़ूएँ भी नई नई होंगीं,
अहले सुबह जब में जागूँगा
खैरो ख़बर सिर्फलिफ़ाफ़े होंगे,
साल दर साल गुज़रते हैं गुज़र
ही जाएंगे याद मगर आएगी,
दिलमें वो ही अरमान बसे होंगे
औऱ तुझसे मिलने के बहाने होंगे,
तमन्नाएं सर उठाने लगी मुश्ताक़
नया साल है, अरमान हजारों होंगे,
— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह “सहज़”
