जीवन सरिता बहती प्रतिपल
कुछ पल का ठहराव ये पथ में, ठहरो, पर, ये, धाम नहीं है।
जीवन सरिता बहती प्रतिपल, रूकने का कोई काम नहीं है।।
जन्म से लेकर मृत्यु तक।
शमशान से बस्ती तक।
अकिंचन से बड़ी हस्ती तक।
हवाई जहाज से कश्ती तक।
अविरल यात्रा है इस जग में, रुक जाए, वह नाम नहीं है।
जीवन सरिता बहती प्रतिपल, रूकने का कोई काम नहीं है।।
शिक्षा ही प्रगति लाती है।
शिक्षा मानव को भाती है।
शिक्षा से पथ मिलता सबको,
शिक्षा विकास गान गाती है।
प्रकृति से शिक्षा मिलती है, शिक्षा बिन कोई राम नहीं है।
जीवन सरिता बहती प्रतिपल, रूकने का कोई काम नहीं है।।
प्रेम नहीं, कभी ठहरा है।
उथला हो या फिर गहरा है।
परिवर्तन है प्रकृति प्रकृति की,
थमा नहीं कोई चेहरा है।
दिन भी चलता, रात भी चलती, गति की कोई शाम नहीं है।
जीवन सरिता बहती प्रतिपल, रूकने का कोई काम नहीं है।।
