भैंसा-भेड़ा-भतीज किसी के नहीं होते
माया की माया गजब, किसको करें दुलार
कभी भतीजे पर लुटें, कभी भ्रात से प्यार
कभी भ्रात से प्यार,बदल जाती हैं चीजें
उन्हें हुआ आभास,धूर्त हैं सभी भतीजे
कह सुरेश फिर बुआ-भतीजे की याद आई
टिपुवा की खुन्नस,आकाश सहे रुसवाई
— सुरेश मिश्र
