कविता

रिश्ते

विश्वास से बनते रिश्ते
बर्दाश्त से चलते रिश्ते
लाभ हानि की भेट चढ़ गए
व्यापार हुए जबसे रिश्ते

जब वक्त नहीं दे पाते
हम अपने अपनो को
महंगे महंगे तोहफों से बस
लोग सहेजे अपने रिश्ते

कांच से ज्यादा नाजुक हैं
एक ठेस से टूट तो जाते हैं
पर स्मृतियों से हटने में
वक्त बहुत लेते हैं रिश्ते

विश्वासघात से चोटिल रिश्ते
अहम बढ़े तो बोझिल रिश्ते
जज़्बात हीन हो बस ढोते हैं
सिर्फ नाम मात्र के है रिश्ते

— प्रज्ञा पांडेय मनु

*प्रज्ञा पाण्डेय 'मनु'

वापी़, गुजरात