क्षणिका क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 04/04/202504/04/2025 आँखों से आँखें चार हुईं वह आँखों की सीढ़ी चढ़ दिल में उतर गए फिर वह वह न रहे हम हम न रहे