भूषण छंद मुक्तक
भगीरथी गंगा भू पर, आई देखो रुमक-झुमक।
बधाइयां लो सकल सुजन, सुजला सुफला संरक्षक।।
जीवन दात्री का आँचल, डालो मत कूडा- करकट—
स्वच्छ रहे नदिया का जल, कर्म-धर्म जानो सार्थक।।
भगीरथी गंगा भू पर, आई देखो रुमक-झुमक।
बधाइयां लो सकल सुजन, सुजला सुफला संरक्षक।।
जीवन दात्री का आँचल, डालो मत कूडा- करकट—
स्वच्छ रहे नदिया का जल, कर्म-धर्म जानो सार्थक।।