कुण्डली/छंद

शरारतें

करना खूब शरारतें, मौज मिले आनंद।

बचपन की नटखट हँसी, जीवन हो स्वच्छंद।।

जीवन हो स्वच्छंद,  जिंदगी महके चहके।

पढ़ो लिखो लो ज्ञान, कला कौशल से दमके।।

खेल-कूद अभ्यास, विजय पथ तुमको चलना।

पाना अपना लक्ष्य, नाम तुम रोशन करना।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८