कविता

जमाना बदल गया है

आज के समय में जो व्यक्ति
धाराप्रवाह बकलोली कूट सकता है,
वो निश्चित रूप से महफ़िल लूट सकता है,
लोग उब चुके हैं उन घिसी पिटी तरीकों से,
ईमानदारी नैतिकता सच बोलना
नहीं सुहाता है किसी को आज,
वो बदलना चाहता है पुरातन रिवाज़,
अब चाहिए ऐसा माहौल,
जहां लोगों को झूठे सपने दिखाये जाये,
चुटकी भर में बड़ा आदमी
बनना सिखाया जाये,
जब फिल्में हमें
झूठी तसल्ली दिला सकता है,
झूठ से भरपूर पैसा कमा सकता है,
तो नेता क्यों नहीं,
अभिनेता क्यों नहीं,
मुखिया क्यों नहीं,
गांव का सुखिया क्यों नहीं,
आज सबको चांद तारे तक
जल्द जाने का जुनून है,
बूढ़े से जवान तक का गरम खून है,
रहनुमा वहीं अच्छा जो वादे पूरे न करे,
सबको बातों में उलझाकर अपनी तिजोरी भरे,
जमाना बदल गया है भाई,
क्षण क्षण में हो मोटी कमाई,
कल का क्या भरोसा कल आए न आए,
मेरी बातों से सहमत न हो तो एतराज जताएं।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554