लघुकथा

आंचल की चुप्पी

कमला का आंचल कभी दूध से भीगा रहता था, कभी आँसुओं से। हर बार जब पति गुस्से में हाथ उठाते, वह चुप रह जाती। माँ कहती थी — “औरत का गहना उसकी सहनशीलता होती है।” कमला ने भी मान लिया था कि चुप रहना ही उसकी ज़िम्मेदारी है। एक दिन उसकी बेटी ने पूछा — “माँ, आप कुछ बोलती क्यों नहीं?” कमला ने उस दिन पहली बार आंचल से आँसू पोंछे नहीं, झटक दिए। वही दिन था जब चुप्पी ने बोलना शुरू किया — पहले डायरी में, फिर सभाओं में। अब उसकी चुप्पी औरों की आवाज़ बन चुकी है।

— प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh