लघुकथा

अधूरी चिट्ठी

रश्मि हर शाम बालकनी में बैठकर एक चिट्ठी लिखती थी — अपने पुराने प्रेमी को। शादी के बाद उसका वो हिस्सा कहीं छूट गया था, जो सिर्फ लिख सकता था, साँस ले सकता था। वह चिट्ठी कभी पोस्ट नहीं होती, बस एक डायरी में बंद होती जाती।

एक दिन उसके पति ने वह चिट्ठी पढ़ ली। लेकिन कुछ नहीं कहा। बस, अगली सुबह एक चिट्ठी उसके लिए भी रख छोड़ी — “अगर तुम्हें खुद से बात करनी हो, तो मेरे पास मत आना, अपनी अधूरी चिट्ठियाँ पढ़ लेना। वहाँ की रश्मि ज़्यादा सच्ची है।”

— प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh