गज़ल
सच कभी होता नहीं उनके बयान में
यह बात आती नहीं यार के ध्यान में
वादे भूख मिटाने के खूब किये थे
वे अभी तक टंगे हुये आसमान में
गलत बात हो न जाय उजागर इसलिये
धीरे से बात कहीं आपके कान में
तलवार का ज़माना नहीं रहा भाई
उसे पड़ी रहने दो अब तो म्यान में
प्रकाश हेतु लगाये नहीं रोशनदान
रहता है अंधेरा आपके मकान में
चमचे चाटुकार का सदा है ये काम
पढ़ते हैं कसीदा आका की शान में
ले डूबेगा एक दिन पूरे कुनबे को
पैदा हुआ यही राक्षस खानदान में
देखकर पढ़े हैं जो भी नेता भाषण
चमचे बजाते हैं तालियां सम्मान में
उनका गिरना एक दिन निश्चित है मित्रों
जो रहते हैं चूर सदैव अभिमान में
जर्जर हो चुका है कब गिर पड़े ये तो
रमेश मत रहे आप ऐसे मकान में
— रमेश मनोहरा
