ग़ज़ल
पहले अपने चाल चलन की बातें कर
फिर विषधर की या चंदन की बातें कर
प्यार मुहब्बत दिल धड़कन की बातें कर
अपना है तो अपने पन की बातें कर
जीवन में इस तौर सियासत ठीक नही
यार कभी तो मन से मन की बातें कर
ऐब गिनाने को तो सारी दुनिया है
तू तो मेरे अहले फ़न की बातें कर
तू , तू ही रह उनकी बातों में मत आ
जाने भी दे, मत अनबन की बातें कर
बौद्धिकता से ऊब गया मन कहता है
बच्चा हो जा कुछ बचपन की बातें कर
उनको करने दें अपना ऐजेंडा तय
बंसल तू बस जन गण मन की बातें कर
— सतीश बंसल
