गुरु के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता
“गुरु पूर्णिमा” हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म,
आषाढ़ मास की पूर्णिमा में मनाते कर्म।
गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान एवं कृतज्ञता,
हम करते सदा प्रकट न हो अनभिज्ञता।
यह ज्ञान व शिक्षा के महत्व को दर्शाता,
शिक्षा माध्यम ही जीवन बेहतर बनाता।
“गुरु पूर्णिमा” हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म,
आषाढ़ मास की पूर्णिमा में मनाते कर्म।
आध्यात्मिक विकास महत्वपूर्ण है होता,
भिन्न पौराणिक कथाओं से गहरा नाता।
महाभारत में कृष्ण ने गुरु महत्व बताया,
ईश्वर ने अर्जुन को गुरु अस्तित्व बताया।
“गुरु पूर्णिमा” हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म,
आषाढ़ मास की पूर्णिमा में मनाते कर्म।
इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ,
उन्होंने वेदों को व्यवस्थित विभक्त किया।
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद,
महाभारत की रचना एवं 18 पुराण भेंट।
— संजय एम तराणेकर
