चलता रहता जीवन चक्र
चलता रहता है जीवन का चक्र,
खुशी और ग़म का होता जिक्र।
हम एक-दूजे की करते हैं फिक्र,
ये एक परिवार हैं जिस पे फ़ख्र।
अनुभव किया हो गए हैं हम बड़े,
आज सब हमारे साथ ही हैं खड़े।
चलता रहता है जीवन का चक्र,
खुशी और ग़म का होता जिक्र।
बचपन पिता संग हँसते-खेलते,
माँ करती परवरिश रोटी बेलते।
यौवन आया संघर्षों को झेलते,
सुख-दुःख के क्षण मिलते रहते।
— संजय एम तराणेकर
