कविता

रिश्ते का मोल

कुछ लोग बहुत ही चतुर चालाक होते हैं,
बड़ी आसानी से रिश्तों का मोल लगा लेते हैं,
और तथाकथित अपनों को
खुशी खुशी बेझिझक रुला देते हैं,
उनके लिए संबंधों से पैसे निकालना
बांये हाथ का खेल है,
वो खुद को मानता इंजन और
संबंधी डिब्बा रेल है,
जाहिर है इंजन मनमानी कर सकता है,
किसी की संपत्ति या रकम
अपनी सुविधानुसार
खुद की जेब में धर सकता है,
शत प्रतिशत मजबूरी वाले द्वारा
अपनी रकम मांगने से
दस प्रतिशत मजबूरी बताता है,
रिश्तेदार दूर वाला हो या खून का
आंसू तो खून का ही रुलाता है,
कोई नौकरी दिलाने के नाम पर,
कोई स्थानांतरण के नाम पर,
कोई रिश्ता बनाये रखने के नाम पर,
कोई उपज लूटने के नाम पर,
संबंधों को लटकाए हुए हैं,
या कहें बेवकूफ बनाए हुए हैं,
किसी को मारकर तड़पाकर
आनंदमय जिंदगी जीने के
आपके जज्बे को या लालच को सलाम,
शायद इसीलिए संयुक्त परिवार टूट रहा।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554