कविता

नमामि शमीशान नमामि शूलपाणि

सावन व्रत मेरा है सत्य संकल्पित,
श्रद्धा शब्द सुमन करूॅं तुम्हें अर्पित,
हरो दुख मेरा महाकालेश्वर महेश,
तन मन सब तुमको किया समर्पित ।

गंगाजल तुम्हें नित मैं बाबा चढ़ाऊॅं,
सुगंध धूप दीप और कपूर जलाऊॅं,
करो कृपा कपालेश्वर कांटों क्लेश
प्रेम से भक्तिमय कीर्तन भी सुनाऊॅं ।

शिवराज भक्तजन करें तेरी आराधना,
सावन मास की यह सुंदरतम साधना,
भरो भण्डार भूतेश्वर भूतनाथ भूतेश,
पूरी करो भोले सबकी मनोकामना ।

तुम करूणाकर कृपाल करूणानिधि,
देते हो भक्तों को “आनंद” सुधा निधि,
वर दो त्रिपुरारि त्रिकालज्ञ त्र्यंबकेश,
पाऊॅं जीवन में सिद्धि शान्ति समाधि ।

कृपा से आपकी मेरी हो मधु वाणी,
सुखमय समृद्धिशाली हो हर प्राणी,
जगा दो ज्योति सर्वेश्वरदयाल सर्वेश,
नमामि शमीशान नमामि शूलपाणि ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु