हम नौजवान
बुलंद हौसले ले चले, आज के हम नौजवान।
आत्मविश्वास से भरे, आज के हम नौजवान।।
हो शुभांशु शुक्ला-सा गगन वीर,
या नीरज-सा भाला फेंके धीर,
‘सिंदूर’ की व्योमिका-सी वीर बने,
वीरांगना सोफिया-सी हम शूर।।
आधुनिकता के हम साथ-साथ,
थामे सनातन धर्म संस्कार हाथ,
काँवडिये गंगा जल ले नंगे पाँव अथक,
करने महादेव शिव शंकर अभिषेक।।
हम श्रमजीवी, सतत करते अभ्यास,
यश गौरव पाने का सदा करते प्रयास,
बढे चले, बढे चले, चुनते शूल बढे चले,
थके न हम कभी, तेजोमय हो प्रभास।।
जीत का स्वप्न सहेज, नौजवान हम चले,
कुछेक भूले-भटके, भौतिकता में फंसे,
चक्काचौंध से भ्रमित राष्ट्रद्रोही वे बने,
कठोरतम दंड दे, पथभ्रष्ट तत्वों से बचे।।
सीमा पर सजग, सक्षम नौजवान हैं,
अन्नदाता हलधर के अनंत उपकार हैं,
नौजवान हर क्षेत्र में अग्रणी, सुजान हैं,
उज्जवल भविष्य के प्रदीप दिवाकर हैं।।
