सावन झूमता आया है
उमड़ घुमड़ घन आए गगन में मन मेरा लहराए।
मन में उमंगें, तन में तरंगें, कारे बदरा लाए।
पिया-मिलन की ऋतु अलबेली, झूम रहा मन बावरा।
बाट निहारूं कब काली कोयलिया पी का संदेशा लाए!
दादुर-मोर-पपीहा बोले, कजरी की छिड़ गई तान।
खनक चूड़ियों की गूंजे, घन में तड़ित दिखाए शान।
नेह निराला प्रीतम का, पायल की रुनझुन बोले।
आएंगे मेरे साजन इस सावन, पूरे हों सब अरमान।
हरियाली का गीत सुनाता सावन सजीला आया है।
खुशहाली की बीन बजाता सावन सुहाना आया है।
उमड़-घुमड़ कर मेघा बरसे, दम-दम दामिनी दमके।
पड़ गए हैं उपवन में झूले, सावन झूमता आया है।
— लीला तिवानी
