जीवन पारी
“मीनू दीदी, हम सब सीनियर सिटीजन घुमने जा रहे हैं? आप दोनों हमारे साथ चलोगे?”
” बहुत मजा आयेगा।”
“अरे सोनू, मेरे तो पैरों में बहुत दर्द रहता है आजकल।”
” और अजय जी का भी शुगर लेवलबढा हुआ है।”
” मीनू दीदी, हम सबकी उम्र के साथ कुछ न कुछ उलझनें हैं ही।”
“मन बना लो। मैं ने आपका नाम लिखवा दिया है।”
” और हां, साथ में भारतीय पोशाख के साथ वेस्टर्न ड्रेसेज भी ले लेना।”
” मैं तो पहनती भी नहीं हूं। मेरे पास है ही नहीं।”।”
“दीदी, बहुत मजा आयेगा। आप तैयारी कर दो। जीजू से भी कह देना।”
आज निकलना हैं। अपनी जिम्मेदारियां निभाते निभाते भूल ही गये थे वे हमें भी जीने का आनंद लेना हैं। अब बेटा विदेश में बस गया और बिटिया ससुराल में रम गयी तो फुरसत ही फुरसत हैं। अपनी इच्छानुसार घुमो, फिरो। फंड की भी चिंता नहीं।
मंगल ट्रैवल की सारी व्यवस्था अत्त्युत्तम थी। खान-पान भी बुजुर्गों का ध्यान रखकर बनता था।एक दुसरे के साथ हंसते खेलते पर्यटन का आनंद आ रहा था।
रोज थोडा थोडा घुमना, कभी देव दर्शन, शाम को अंताक्षरी, कभी सुर लय महफिल सजती। ना नुसार करते धीरे-धीरे सब घुल मिल गये। फिर क्या था, महफिल में सबरंग भर गये। मीनू की मीठी आवाज के सब दीवाने हो गये। अजय जी की मिमिक्री ने सबका दिल जीत लिया।
आज वेस्टर्न ड्रेसेज पहनना था। शरमाते शरमाते मीनू जी ने अजय जी को देखा तो नि:शब्द रह गये वो।
“जीन्स टी शर्ट पहनकर गजब लग रही हो मीनू तुम। हॅट पहनकर मेमसाब लग रही हो।”
“अब अगला टूर विदेश भ्रमण होगा डार्लिंग मीनू।”
अजय जी अपने आप को रोक ही न पाये। बाहों में भर लिया मीनू जी को।
मौसम दीवाना हो रहा था। दोनों एक दुसरे में खोये-खोये से।
सबने तालियां बजायी तो दोनों शरमा गये। याद आ गये भूले बिसरे दिन।
अब तो अजय जी भी चुस्त दुरुस्त रहने लगे। एक दुसरे के हाथ थाम जिंदगी के नये रंग में दोनों ढल गये थे।
” कितना मजा आ रहा है सबके साथ। सोनू लाख’लाख शुक्रिया तुम्हारा। हमने जान लिया, संध्याकाल की यह जीवन पारी बोझ नहीं हैं।
