कविता

रिटायरमेंट के बाद

रिटायरमेंट के बाद थोड़ा असहज सा खुद को पाता हूँ।
सब रिश्ते तो वही हैं,पर जाने क्यों मैं हिचकिचाता हूँ।

कोशिश रहती है कि खुद के सारे काम खुद ही कर लूं मैं।
क्यों मेरे लिए कोई कष्ट इतना भी करे सब खुद कर लूं मैं।

सब घरवाले तो कर रहे यत्न कि पहले की सी दिनचर्या चले,
जाने क्यों मैं हड़बड़ाहट में चाहता हूं सब काम जल्दी से करें।

समय इतना है खुलकर कि कैसे बिताएं सोचता रहता हूं,
बातें भी कम करने लगा हूं कि कोई न सोचें कि बोलता रहता हूं।

आता है सबकी ज़िन्दगी में ये पड़ाव इक दिन ज़रूर,
कोई नौकरी से, कोई बिजनेस से कोई किसी काम से होता है दूर।

समय तो चलता रहता है नहीं रुकता किसी के लिए आखिर,
काश ! हम भी चल पाते इसके साथ बेझिझक खत्म जब तक हो सफ़र।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |