कविता

पॉलीथिन हटाओ

बाजार में भगदड़ मची थी 

दुकानों के शटर गिर रहे थे 

सब्जी के ठेले वाले 

इधर उधर भाग रहे थे 

मैं हाथ में थैला लिए 

बीच चौक आवाक सा खड़ा था 

अचानक मौसम ने करवट ली 

काले घने बादल छाये 

छा कर मूसलाधार बरसने लगे 

वो अधिकारी जो प्लास्टिक रुकवाने के लिए 

छापा मारने आये थे 

वही सब्जी के ठेले वाले को रुकवाकर 

अपने मोबाइल और पर्स को बचाने के लिए 

उससे पॉलीथिन की थैली मांग रहे थे

*ब्रजेश गुप्ता

मैं भारतीय स्टेट बैंक ,आगरा के प्रशासनिक कार्यालय से प्रबंधक के रूप में 2015 में रिटायर्ड हुआ हूं वर्तमान में पुष्पांजलि गार्डेनिया, सिकंदरा में रिटायर्ड जीवन व्यतीत कर रहा है कुछ माह से मैं अपने विचारों का संकलन कर रहा हूं M- 9917474020