अंतरिक्ष – यात्रा
आओ! हम योजना बनाएँ।
अंतरिक्ष – यात्रा पर जाएँ।
चंदा मामा के घर ठहरें
धमाचौकड़ी वहीं मचाएँ।
नए – नए रहस्य जानेंगे
मस्ती से छुट्टियाँ बिताएँ।
सौरऊर्जायान क्षितिज पर
बड़े मजे से खूब उड़ाएँ।
शून्य गुरुत्वाकर्षण में हम
नए – नए करतब दिखलाएँ।
मिट्टी, पानी, खनिज धातुएँ
कई शीशियों में भर लाएँ।
वहीं से देखेंगे धरती को
हरियाली पर बलि – बलि जाएँ।
मंगल ग्रह अगला पड़ाव है
अपनी बस्ती नई बसाएँ।
गगनयान इसरो भेजेगा
यात्रियों में नाम लिखाएँ।
— गौरीशंकर वैश्य विनम्र
