निकल गया
सारा जीवन बस ऐसे ही निकल गया,
कल की तलाश में आज निकल गया,
बचपन खेल में जवानी प्यार में गुजर गया,
व्यस्तता के चलते जीवन यों ही निकल गया,
कभी जीवन में मुश्किल वक्त आ गया,
लड़ने,मानने में ही पूरा जीवन निकल गया,
बच्चों की परवरिश कभी उनको सिखाने में निकल गया,
कभी उनके जीवन को संवारने में निकल गया,
घर की जिम्मेदारी और फर्ज निभाने में निकल गया,
अपने लिए सोच न पाए दूसरों को मानने में निकल गया.
— पूनम गुप्ता
